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एक प्राइमरी शिक्षक का दर्द
September 20, 2019 • एडमिन

समय बदल गया है,,,, बेसिक शिक्षा पर अब शायद ही कोई मेहरबान हो,,,

उम्मीद की किरण नज़र नहीं आ रही है।देखते देखते दो चार महीनों में ही सब बदल गया। सरल कही जाने वाली शिक्षक की नौकरी आज सबसे कठिन हो गयी है। सन 2019 बेसिक शिक्षा के लिये सबसे दुर्दिनों वाला साल कहा जायेगा। इस नौकरी में टेक्निकल प्रॉब्लम है। 
फल लेने जाओ तो निलम्बित,,, न लेने जाओ तो निलम्बित,,, पहले से 150 फल  लेकर रखो तो आखिर रखो ही कहाँ,,,कुछ फल तो जरूर खराब हो जाते हैं
सच है तनाव बहुत बढ़ गया है लेकिन सरकार हम शिक्षकों की समस्या सुनने को तैयार नहीं है बच्चे नहीं आते हैं तो बुलाने जाओ,,,बुलाने गए तो बाकी स्कूल में मौजूद बच्चों की पढ़ाई का नुकसान,,,ऊपर से रोज मीटिंग,,रोज नवाचार,,रोज कोई दिवस,,रोज कोई अभियान,,, रोज कोई सूचना,,इस नौकरी में टेक्निकल प्रॉब्लम है।।  कहते हैं 15% नामांकन बढ़ाओ,,,कैसे बढ़ाएं,,,बच्चे ही नहीं हैं,,,एक ही समय मे GLP चल रही है STIR भी चल रहा है परम्परागत ढंग से कोर्स भी क्रमशः आगे बढ़ना है,,,,जो बच्चे महीनों नहीं आते उनका नाम भी काट नहीं सकते क्योंकि ऐसे ही नामांकन का दबाव बनाया जा रहा है,,, जो नहीं आते उनको भी न्यूनतम अधिगम कराना है अन्यथा लोग कहेंगे कि प्राइमरी में 4 साल से पढ़ रहा है और आता जाता कुछ नहीं मेरे बच्चे को,,,इससे विद्यालय की छवि खराब होने से भी बचाना है।
मिडडेमील की भी व्यवस्था करना है।
सिलेंडर ढोना है इतने काम हैं कि कोई न कोई काम पेंडिंग में पड़ा ही रहता है।
रजिस्टर कम्पलीट नहीं तो चेकिंग की चिंता,,,पढ़ाई कमजोर तो पर्यवेक्षण व छवि की चिंता,,,व्यवस्था सुधारो तो बाकी चीजें गड़बड़ा जाती हैं।यदि अधिकारी चाह लेगा तो कोई न कोई कमी दिखाकर आपको निलंबित कर ही देगा।क्योंकि विद्यालय में सब कुछ A-Z कम्पलीट और ok हो ही नहीं सकता।सरकार की पॉलिसी है कि शिक्षक उपस्थित रहते हुए भी ना पढ़ा पाएं अतः शिक्षण कार्य में  ह्रास होना बिल्कुल  लाज़मी है और इस तरह वह शिक्षक को निकम्मा साबित कर ले जाएंगे । शिक्षक को गैर शैक्षणिक कार्य इसीलिए सरकार देती  है कि  वह शिक्षण कार्य न कर पाए। अन्य विभाग का कोई भी अन्य कार्य नहीं करते हैं जैसे बैंकिंग वाला सिर्फ बैंकिंग का ही कार्य करेगा अन्य कार्य नहीं करेगा। शिक्षक को लगभग 30 गैर शैक्षणिक कार्य दिए गए हैं गुणवत्ता कहां से आएगी ऊपर से शिक्षकों का अभावबेसिक शिक्षा में ढेर सारे नियमों और जिम्मेदारियों की वजह से एक प्रकार की प्रताड़ित करने वाली व्यवस्था विकसित हो गई है जिसे शासन समझ नहीं रहा है और शिक्षक घुटन महसूस कर रहा है। 
*इसका स्थायी हल ढूढ़ना होगा अन्यथा नौकरी पार नहीं हो पाएगी,,*❗❗
*इसलिए साथियों संगठित रहो, क्योंकि एकजुट होकर ही कुछ किया जा सकता है, मेरा सभी संगठनों से भी निवेदन है कि एक साथ रहें तभी सफलता मिल सकती है अन्यथा सरकार हमको बाहर का रास्ता दिखाने का कार्य कर रही है।*