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..तो क्या मायावती को आईना दिखा रहे योगेश वर्मा ? निष्कासन के बाद मेरठ में बसपा का सफाया करने में लगे पूर्व विधायक
November 19, 2019 • TRUE स्टोरी टीम

 


( शाहवेज़ खान)


मेरठ।बहुजन समाज पार्टी के पूर्व विधायक योगेश वर्मा  व मेरठ की मेयर सुनीता के पार्टी से निष्कासन के बाद पार्टी की राजनीती मेरठ में हिचकोले खा रही है एक के बाद एक इस्तीफे से पार्टी की जमीनी पकड़ लगातार कमजोर पड़ रही है और योगेश वर्मा अपने मजबूत समर्थकों के बल पर बसपा सुप्रीमो मायावती को यह आईना दिखाने की कोशिश कर रहे है कि अब मेरठ में बसपा को ज़िंदा रखना है तो उनके कंधों का इस्तेमाल पार्टी को करना ही होगा।वरना यही कंधे पार्टी की अर्थी   निकालने के लिए काफी है। योगेश वर्मा हस्तिनापुर विधानसभा के साथ अब मेरठ की राजनीती में भी सक्रिय है और उनकी पत्नी सुनीता वर्मा  के मेयर बनने के बाद पार्षदो का झुकाव भी पार्टी से ज्यादा मेयर की तरफ  है। बीते लगभग 2 हफ़्तों से पूर्व विधायक योगेश वर्मा अपने निस्कासन के बाद यह दिखाने की कोशिश कर रहे है कि उनकी बात सुने बिना किसी निर्णय पर पहुचना पार्टी का गलत फैसला है। वही बसपा प्रदेश की टीम  अब योगेश वर्मा के द्वारा भड़काए जा रहे बसपाइयों पर नाराज़ है।पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि जिस तरह योगेश वर्मा रास्ट्रीय अध्यक्ष के फैसले के बाद पार्टी को कमजोर कर रहे है उससे वह अपने लिए ही एक खाई खोद रहे है।उनके इस काम से न सिर्फ उनका राजनीतिक जीवन बर्बाद हो रहा है बल्कि योगेश वर्मा के षड्यंत्र का शिकार दर्जनों युवा भी हो रहे है, वह भी आवेश में आकर अपने ही समाज की पीठ में छुरा भोकने की फिराक में है। यह सब बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर की नीतियों से भटक रहे है।
गौरतलब है कि जब से मेरठ मेयर व पूर्व विधायक का निस्कासन हुआ है तब से योगेश अपने समथकों के बल पर मेरठ में पार्टी को पुरी तरह डब्बे में बन्द करने पर काम कर रहे है और पूरी मेहनत कर रहे है कि पार्टी से ज्यादा से ज्यादा लोग अपना इस्तीफा देकर उनके साथ आए और बसपा अध्यक्ष मायावती को आइना दिखाए की अब मेरठ में बसपा मायावती व बाबा साहेब के नाम पर नही बल्कि योगेश वर्मा के नाम से चलती है और इसी नाम से ही पार्टी में लोग जुड़ते है। उनके इस काम के बाद 
अब देखना यह है कि मेरठ में योगेश के निस्कासन के बाद पार्टी की फजीहत कराने वाली बसपा सुप्रीमो मायावती , पूर्व विधायक योगेश वर्मा के सामने झुक कर उनका निस्कासन वापस लेती है या योगेश वर्मा को उन्हीं के हाल पर छोड़ती है । क्यों कि यह बात सभी जानते है कि राजनीति में न तो कोई सदा के लिए दुश्मन होता है और न ही कोई सदा के लिए दोस्त।