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12 मई : अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे पर विशेष
May 11, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • स्वास्थ्य


 
 मरीजों के स्वस्थ होने पर होती है सुखद अनुभूति- प्रमिला मैसी
 
अस्पताल में सबसे करीबी नर्स ही होती है, जो ख्याल रखती है
 संजय वर्मा

मेरठ। अपने व्यवहार से किसी भी मरीज का दिल जीता जा सकता है। बस मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें, क्योंकि अस्पताल में आने के बाद सबसे करीबी नर्स ही होती है, जो उसका ख्याल रखती है। अगर आपका व्यवहार अच्छा रहेगा तो मरीज का बर्ताव आपके  प्रति और अच्छा होगा। अस्पताल में आये मरीजों के ठीक हो जाने पर उन्हें सुखद अनूभुति मिलती है। यह कहना है स्टाफ नर्स प्रमिला मैसी का। सिस्टर मैसी कहती हैं कि कोरोना संक्रमण काल में नर्सो की भूमिका और भी अहम हो गयी है। अइसोलेशन वार्ड में कोरोना से संक्रमित मरीजों से तमाम खतरा होने के बाद भी मरीजों की सेवा करना उन्हें अच्छा लग रहा है। जिसे बया नहीं किया जा सकता है।
  मूल रूप से सरधना व वर्तमान में ग्रेटर गंगा नगर निवासी प्रमिला मैसी स्टॉफ नर्स के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मवाना में कार्यरत हैं। वह 2007 से मरीजों की सेवा में लगी हैं। उनकी डयूटी ओटी में रहती है। प्रमिला मैसी को बचपन से ही लोगों की सेवा करना काफी अच्छा लगता था। टीवी पर कई सीरियल में नर्सों को मरीजों की सेवा करते देखा, इस सब से वह बहुत प्रभावित हुईं और नर्सिंग का कोर्स किया। इसमें उनकी मां शकुतन्तला मैसी, पिता डेविड मल की अहम भूमिका रही।
 उन्होंने बताया सन् 1999 में किला परीक्षिगढ़ से नर्सिंग की सेवा आरंभ की थी। सन् 1992 में उनकी शादी बिजनौर निवासी मार्दस मैसी के साथ हुई। शादी के बाद पति की अहम भूमिका रही। प्रमिला ने बताया 21 साल की नौकरी में कई बार ऐसे मौके आये। जब आधी रात के समय उन्हें सिजेरियन के लिये सीएचसी  जाना पड़ा।
  कोहरा होने के बाद भी महिला की जिदंगी बचायी
सिस्टर प्रमिला बताती हैं चार साल पहले की बात है। रात को एक बजे एक महिला का आपरेशन होना था। रात के समय इतना कोहरा था कि दो फुटा भी नहीं दिखायी दे रहा था। ऐसे में मरीज की जिंदगी उनकी पहली प्राथमिकता थी। रात के समय अपने पति के साथ बाइक पर सवार होकर सीएचसी मवाना पहुंची। वहां पर महिला का सफल आपरेशन किया गया। उन्होंने बताया इस तरह के वाकये नौकरी के दौरान काफी हुए, जिन्हें चुनौती मानकर मरीजों की सेवा की। कोविड -19 के चलते वाहनों के आने जाने पर रोक लगी है। ऐसे में उनके पति व बच्चे सीएचसी पहुचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा नर्सिंग का क्षेत्र  चुनौतियों से भरा है। इसके लिये परिवार का सपोर्ट होना आवश्यक है।
  कोरोना हारेगा , बस घर में रहें
 प्रमिला मैसी का कहना है कि कोरोना हर हाल में हारेगा। आधी जंग हम जीत चुके हैं। आधी जीतनी बाकी है। बस लोग अपने घरों में ही रहें, अनावश्यक घरों से बाहर न निकलें, लगातार हाथों धोते रहें और जब भी बाहर निकलना पड़े मास्क जरूर पहनें।
 
12 मई को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे
इटली में पैदा हुई फ्लोरेंस नाइटिंगेल एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा की। सन् 1853-1856 में क्रीमिया युद्ध में हाथ में लैंप लिए वह रात को घायल सैनिकों की सेवा के लिए घर से निकलती थीं। उनके घावों पर मरहम लगाती थीं। यही वजह है कि वह 'लेडी विद द लैंप' के नाम से न केवल विख्यात हुईं बल्कि आज भी नर्सिग के क्षेत्र में आने वालों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। 12 मई को नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। उनके जन्मदिन को ही अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे के तौर पर मनाया जाता है। सन् 1965 में नर्सेज डे मनाने की शुरुआत हुई।