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२१ नवम्बर तक चलेगा नवजात शिशु देखभाल सप्ताह ० नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाना उद्देश्य ०  6 माह तक मां का दूध पिलाने पर फोकस
November 18, 2019 • TRUE स्टोरी टीम

(संजय वर्मा)
मेरठ  जिले में नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है। 14 नवम्बर से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 21 नवम्बर तक चलेगा। इस सप्ताह के आयोजन के मुख्य उद्देश्य नवजात शिशु की आवश्यक देखभाल करने के संबंध में जनसमुदाय को जागरूक कर नवजात शिशु मृत्युदर में कमी लानाए जन्म के बाद शीघ्र स्तनपानए 6 माह तक केवल स्तनपान और 6 माह के बाद ऊपरी आहार से बच्चों को कुपोषित होने से बचाना तथा शिशुओं का समय से टीकाकरण करना है।
 राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की अपर मिशन निदेशक जसजीत कौर द्वारा जारी पत्र में भारत सरकार की रिपोर्ट -आरएस2016 का हवाला देते हुए कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्युदर 43 प्रति 1000 जीवित जन्म है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 34 प्रति हजार है। इनमें 3.4 शिशुओं की मृत्यु पहले महीने में हो जाती है। जनसामान्य को नवजात शिशु स्वास्थ्य के विषय में जागरूक करने के लिए नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. पूजा शर्मा ने बताया ब्लाक स्तर पर क्रियाशील स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारियों और संबंधित अन्य विभागों के प्रमुखों को कहा गया है कि वह लोगों को शिशुओं की आवश्यक देखभाल के लिए जागरूक करते हुए उन्हें बताएं कि प्रसव चिकित्सालय में ही कराएं और प्रसव के बाद 48 घंटे तक मां एवं शिशु की उचित देखभाल के लिए अस्पताल में रुकें। नवजात को तुरंत नहीं नहलाएं, शरीर पोंछ कर नर्म साफ कपड़े पहनाएं। जन्म के एक घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध पिलाना शुरू कर दें और 6 महीने तक केवल स्तनपान ही कराएं। जन्म के तुरंत बाद नवजात का वजन लें और नियमित टीकाकरण कराएं। नवजात की नाभि सूखी एवं साफ रखेए संक्रमण से बचाएंए  मां एवं शिशु की व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें। कम वजन एवं समय से पहले जन्मे शिशुओं का विशेष ध्यान रखें। शिशु का तापमान स्थिर रखने के लिए कंगारू मदर केयर विधि अपनाएं। कुपोषण और संक्रमण से बचाव के लिए 6 महीने तक केवल मां का दूध पिलाएं, शहद, घुट्टी पानी आदि बिल्कुल नहीं पिलाएं।
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डा.मनीषा वर्मा ने कहा कि शिशु के जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान तथा 6 माह तक केवल मां का दूध पिलाने से शिशु मृत्युदर में 20-22 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है। इसलिए यह जानकारी आमजन तक पंहुचाना बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया इसके लिए विभाग पोस्टर, बैनर, गोष्ठी आदि से प्रचार प्रसार करवा रहा है। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों को नवजात शिशु देखभाल सप्ताह मनाने के निर्देश जारी किये गये हैं।