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हिंदी फिल्म पानीपत के विरोध में उठे स्वर, प्रतिबंध लगाये जाने की मांग
November 16, 2019 • TRUE स्टोरी टीम

मुजफ्फरनगर।  फिल्मी निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'पानीपत' आगामी 6 दिसम्बर को रिलीज होने वाली है। इस फिल्म के सभी किरदारों के लुक के पोस्टर व ट्रेलर रिलीज हो चुके है। एक और जंहा फिल्मी कलाकारों के फैन्स इनकी तारीपफ कर रहे है वंही मूवी की कहानी और किरदारों के फिल्मांकन को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे है। मराठो व अहमद सा अब्दाली के बीच पानीपत में हुई तीसरी लड़ाई पर आधारित फिल्म 'पानीपत' में अहमद शाह अब्दाली के महिमा मंडन पर एतराज जताते हुए मुदगल चेतना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सत्य प्रकाश शर्मा ने आरोप लगाया है कि पिफल्म के निर्देशक ने ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़- मरोड़ कर पेश किया है जोकि ना केवल हमारे वीर मराठा पूर्वजो का अपमान है बल्कि अहमद सा अब्दाली जैसे आतताई को महान योद्धा  के तौर पर पेश किया जाना भारतीय इतिहास के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
शनिवार को मुदगल चेतना परिवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सत्य प्रकाश मुदगल की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में हरियाणा, दिल्ली, पंजाब ,उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व राजस्थान से आए संगठन के प्रमुख सदस्यों ने एक स्वर में सरकार से फ़िल्म प्रतिबंधित किए जाने की मांग की। बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष डाक्टर मुदगल ने कहा की फिल्म का जो ट्रेलर दिखाया जा रहा है उसमें स्पष्ट तौर पर अब्दाली को महान योद्धा के तौर पर पेश किया गया है जो कि अपनी जन्मभूमि से हजारों मील दूर अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए लड़ने आए वीर मराठों का घोर अपमान है। उन्होंने अपने मराठा पूर्वजों दादा मोहन जी राव दादा सोहन जी राव के द्वारा पानीपत की लड़ाई में दिए गए योगदान का जिक्र करते हुए कहा की लड़ाई के बाद भी महाराष्ट्र वापस न लौट कर उन वीरो ने अपना पूरा जीवन अत्याचारों के खिलापफ जंग जारी रखने में व्यतीत किया। पूर्व सरपंच राहुल देव मुदगल ने कहा कि सदाशिवराव भाऊ जी के वंशज दादा मोहन जी राव व  सोहन जी राव जैसे महान लोगो की कर्म स्थली कसार में तथा अन्य स्थानों पर जाकर बसे उनके सभी वंशजों में अत्याचारी अब्दाली को नायक की तरह पेश किए जाने पर भारी रोष है, जिसके तहत फिल्म को सरकार द्वारा प्रतिबंधित न किए जाने की सूरत में हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। गाजियाबाद के कुम्हेड़ा से आए सुधीर मुदगल ने कहा कि पानीपत युद्व के पश्चात दादा मोहन जी राव जैसे महान योद्धाओ के वंशज जो कसार हरियाणा में बस जाने के बाद अब दिल्ली में उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बस गए हैं उन सभी मराठों के वंशजों में  फ़िल्म को लेकर भारी आक्रोश नजर आ रहा है।
इस अवसर पर वरिष्ठ प्रवक्ता अनुज मुदगल, सचिन मुदगल            तुमरेल, घनश्याम मुदगल ग्वालियर, देवदत्त मुदगल पानीपत, ललित मुदगल अलीगढ,बीरबल मुदगल दिल्ली सहित संगठन के संरक्षक पूर्व एसीपी दिल्ली टी.आर. मुदगल, आचार्य पंडित हुकुमचंद मुदगल सहित संगठन के तमाम उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके अब्दाली को नायक के तौर पर पेश किए जाने का विरोध करते हुए  प्रतिबंधित किए जाने की मांग की। इसके अतिरिक्त संगठन के सभी सदस्य अपने- अपने क्षेत्र मे ज्ञापन देकर फिल्म को      प्रतिबन्धित करने की मांग जोर-शोर से उठायगे।