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कम्पैन मशीन पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी
November 3, 2019 • TRUE स्टोरी टीम


      पराली जलाने व प्रदूषण की जिम्मेदार कंपैन मशीन - मास्टर विजय सिंह

आजकल उत्तर प्रदेश दिल्ली हरियाणा पंजाब भयंकर प्रदूषण की चपेट में लोगों को सांस लेने में बड़ी परेशानी हो रही है तथा स्वास्थ्य  बुरा असर पड़ रहा है इसके लिए धान के अवशेष पराली को जलाना जिम्मेदार माना जा रहा है। जिस पराली को अनउपयोगी मानकर जलाया जा रहा हूं और जिसके कारण भयंकर प्रदूषण फैलता हो उसकी पूरी तरह से जिम्मेदार धान की कटाई में प्रयोग हो रही है कंपैन मशीन है 
    15 वर्ष पूर्व धान की कटाई किसान स्वयं या मजदूरों से कराता था धान के साथ-साथ उसे पराली से भी आय होती थी हाथ की काटी  धान की पराली को किसान अपने पशुओ को भी खिलाते थे तथा दूसरे लोग भी अपने पशुओं के लिए पराली खरीदते थे तथा गत्ता मिल पराली खरीद खरीद कर गत्ता बनाने में प्रयोग करते थे जिससे किसान को पराली से आय भी होती थी थोड़ी परेशानी तो अवश्य होती थी 
   आधुनिकता व मशीनीकरण के कारण आज पराली प्रदूषण बेरोजगारी का कारण बन गई मशीनीकरण में धान व गेहूं काटने के लिए कंपैन मशीन आई जिसने बडे किसान को राहत देकर कई भयंकर परेशानियों को जन्म दे दिया जिसमें प्रदूषण बेरोजगारी की भारी समस्या उत्पन्न हो गई क्योंकि कंपैन मशीन धान को 8-10 इंच ऊपर से तथा ऊपर के अवशेष को भी बुरी तरह अस्त व्यस्त कर फैक देती है जो किसी प्रयोग में नहीं आती किसान के सामने जलाने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता । कंपैन मशीन 1 दिन में सैकड़ों बीघा धान व गेहूं की कटाई कर देती है जहां एक और बड़े किसान को मैं इसे राहत महसूस की वही कई परेशानियों को भारी जन्म दे दिया पराली जलाने के कारण भारी प्रदूषण होता है बेरोजगारी फैलती है पशुओं को चारे का अभाव रहता है तथा किसान को पराली से होने वाली आज भी नहीं होती । कंपैन मशीन के कारण बेरोजगारी बहुत बड़ी है लगभग डेढ़ माह तक मजदूरों को खूब मजदूरी मिलती थी हरियाणा पंजाब पश्चिम उत्तर प्रदेश में धान की कटाई के समय बिहार व पूर्वी उत्तर प्रदेश के भारी संख्या में मजदूर मजदूरी करने आते थे तथा उनका मजदूरी से ही 1 वर्ष का चावल प्रबंध हो जाता था जो अब नहीं है मजदूर अब सरकारी राशन कोटे के चावल पर निर्भर हो गया है। किसान व मजदूर 5-6 माह पशुओं को पराली चारे के रूप में खिलाता था जिसका आज अति  अभाव है । कंपैन मशीन के कारण चारों ओर दुष्परिणाम ही नजर आ रहे हैं जिस पर सरकार को प्रतिबंध लगाने या इसका विकल्प तलाशने की आवश्यकता है ।