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कोरोना के कहर के बावजूद,गन्दगी का राज,गंग नहर पटरी पर फैली भारी  गन्दगी से चारों फैल रही दुर्गन्ध,नगर वासियों का जीना मुहाल
April 13, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • मुज़फ्फरनगर

(काज़ी अमजद अली)

कोरोना महामारी से बचाव को लेकर देश भर में लोक् डाउन चल रहा है संक्रमण की रोकथाम को मुज़फ्फरनगर ज़िले में विभिन्न गाँव कस्बों में साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कूड़े की व्यवस्था सहित दवाओं का छिड़काव कर संक्रमण को रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं वहीं जनपद की बड़ी आबादी वाली नगरपालिका खतौली में गंग नहर पटरी पर गन्दगी का राज है खतौली नगर के पश्चिम में गंग नहर स्थित है जहाँ गंग नहर का शीतल जल व नहर पटरी पर खड़े हरे वृक्ष खतौली क्षेत्र की शोभा को बढाते हैं नहर पटरी मार्ग के बन जाने से गंग पटरी पर स्वच्छता व सौन्दर्यकरण आवश्यक हो गया है सौन्दर्यकरण तो दूर की बात नहर पटरी पर दूर तक भारी गन्दगी फैली हुई है  सेंकडों मीटर तक लगे बड़े बड़े गन्दगी के ढेरों पर आवारा जानवर टहल रहे हैं  गन्दगी के ढेरों के बराबर में स्थित घनी आबादी में इस गन्दगी का क्या प्रभाव होगा इसका अंदाज़ा कूड़े के इन अम्बारों को देखकर ही लगाया जा सकता है हाल ही में खतौली क्षेत्र में कोरोना के मामले प्रकाश में आ रहे हैं ऐसे में क्षेत्र की सफ़ाई व्यवस्था को बेहतर बनाना प्रशासन की प्रार्थमिकता में होना चाहिये वही नगर प्रशासन ने सिंचाई विभाग की भूमि को क्यूँ कर डम्बिंग ग्राउण्ड बना डाला है ।

लगभग पचास हज़ार की आबादी वाली नगर पालिका खतौली व्यवसायिक व प्रशासनिक दृष्टि से जनपद के लिये महत्वपूर्ण है  उपजिलाधिकारी कार्यालय के अलावा अनेक प्रशासनिक कार्यालय खतौली में स्थित है नगर पालिका के पश्चिम में स्थित गंग नहर पटरी की उपयोगिता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है अगर सब कुछ ठीक रहा तो हरिद्वार में आयोजित आगामी कुम्भ के  दौरान लाखों तीर्थ यात्रियों को यहाँ से गुजरना है ऐसा नहीं कि गंग नहर पटरी  पर ये गन्दगी के ढ़ेर अचानक लग गए हों पिछले कई वर्षों से इस स्थान पर लगातार कूड़ा डाला जा रहा है।

गंग नहर का धार्मिक महत्व:

*हरिद्वार में माँ गंगा के श्री चरणों से निकली गंग नहर का धार्मिक महत्व भी है कार्तिक पूर्णिमा व ज्येष्ठ गंगा दशहरा के दौरान हज़ारों क्षेत्रवासी खतौली गंग नहर में स्नान कर पुण्य कमाते हैं तथा सावन माह में लाखों शिव भक्त काँवड़ लेकर यहाँ से गुज़रते हैं।

आध्यात्मिक महत्व:

गंग नहर में लगभग दस हज़ार क्यूसेक पानी वर्ष के ग्यारह महीनों (सफाई के दौरान एक नवम्बर माह को छोड़कर) में बहता है खतौली के नागरिक शाम व सुबह के समय नहर के वातावरण का आनन्द लेने के लिये पटरी पर वॉक करते हैं जहाँ हरियाली के स्थान पर दिन प्रतिदिन बढ़ रही गन्दगी मन को भारी कर रही है।

गन्दगी की ओर से आँख मूँदे प्रशासन किस प्रकार कोरोना से जंग लड़ेगा ये सवाल तो उठता है