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कोरोना वायरस से घबराये नहीं, इसकी दवा भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में वसाका नाम से वर्णित है: डॉक्टर सतेंद्र
March 15, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • स्वास्थ्य

कोरोना वायरस से घबराये नहीं इस की दवा भारतीय आयुर्वेद चिकित्सा ग्रंथों में वसाका नाम से वर्णित है -
चीन में फैला हुआ कोरोना वायरस जो कि एक खतरनाक रूप में सामने आ रहा हैं, अब यह भारत मे भी फैल रहा हैं।

कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण
1. तेज बुखार
2. बुखार के बाद खांसी का आना
3. बेचैनी, सिरदर्द और मुख्य रूप से श्वसन संबंधी परेशानी महसूस होना

भारतीय लोगों को कोरोना वायरस से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि इसके रोग के लक्षणों का वर्णन हमारे प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में दिया हुआ है
आयुर्वेद में दवा का नाम वसाका (अरडूसा) नाम से उपलब्ध है।

आयुर्वेदिक निदान -

 आयुर्वेद के कफ सिरफ में वसाका (अरडूसा) का उपयोग होता है इसलिए आप बैधनाथ कंपनी का आयुर्वेदिक कफ सिरफ कासामृत ले सकते है।

आयुर्वेदिक निदान -

(1) गोजिव्हादि क्वाथ 10 ग्राम,बैधनाथ महासुदर्शन चूर्ण 01 ग्राम, गिलोय की हरी ताजा लकड़ी 12 ईंच बड़ी, तुलसी पत्र 5 - 7, कालीमिर्च 3 - 4, सोंठ पाऊडर 1 ग्राम, अरडुसा के ताजा पत्र 4 - 5, हल्दी पाउडर 1 से 2 ग्राम 
इन सबको मिलाकर 250 ML पानी मे मंद आंच मे धीरे धीरे ऊबाले शेष 15 -  20  ML बचने पर सूती सफेद वस्त्र से छान कर गुनगुनाना गुनगुनाना ही पीना है।
लक्षणों से पिड़ित व्यक्ति को दिन में तीन चार बार दिया जा सकता है और स्वास्थ्य व्यक्ति को बचाव की दृष्टि से दिन मे एक बार ले सकता है।
(2). नमक या सफेद फिटकरी के पानी की भाप दिन में तीन चार बार लेनी चाहिए।
(3). प्रत्येक व्यक्ति को प्रति दिन तीन से पांच बार सरसों का तेल नांक के अंदर अंगुली से लगाते रहना चाहिए।
(4). गिलोय की हरी लकड़ी 12 ईंच, तुलसी के 8 - 10 पत्र , शुद्ध शहद एक चम्मच, एक ग्राम हल्दी पाउडर, एक ग्राम सोंठ पाउडर, 3 - 4 कालीमिर्च का पाउडर, इन सबको मिलाकर दिन में दो से तीन बार चाटना या पीना है।
(4) बैधनाथ तालिसादि चूर्ण 1 ग्राम,गोदंती भस्म 250 MG, सर्वज्वरहर लौह 250 MG,
शिर:शुलादि वज्र रस 250 MG,
श्वासकुठार रस 250 MG,
चंद्रामृत रस 250 MG, श्रृंगाराभ्र रस 250 MG,प्रती डोज इन सबका मिश्रण  शहद के साथ दिन मे तीन चार बार लेवें।
(5). Tab - Fifatrol (Amil) एक एक गोली दिन मे तीन से चार बार गर्म पानी से लेवे।
(6).बैधनाथ एलादि वट्टी या मरिच्यादि वट्टी मे से कोई एक तरह की टेबलेट दिन में चार से छ बार चूसनी है।
(7). Sup - बैधनाथ कासामृत की तीन तीन चम्मच गुनगुनाना पानी के साथ दिन में तीन से चार बार लेनी है।
(8).बैधनाथ कंटकारी अवलेह या च्यवनप्राश स्पेशल की एक एक चम्मच दिन मे दो बार लेनी चाहिए। 

यह सावधानियां अप्रैल माह तक रखें और स्वस्थ रहे

(1). आईसक्रीम, कुल्फी, सभी प्रकार की कोल्ड ड्रिंक्स, सभी प्रकार के प्रिज़र्वेटिव फूड्स, डिब्बा बंद भोजन, मिल्क शेक, कच्चा बर्फ यानी गोला चुस्की, मिल्क शेक या मिल्क स्वीटनर 48 घंटे पुराने खाने से बचे क्योंकि कोरोना वायरस गर्मी से निष्क्रिय हो जाता है इस लिए तेज़ गर्मी यानी 35℃ से ज्यादा होने तक रुके।
(2).किसी से भी हाथ नहीं मिलाए, हाथ जोड़कर ही अभिवादन करे, ओर स्वीकार करें।
(3).नांक पर हर व्यक्ति वायरस रोधी मास्क लगाकर रखें।
(4).भोजन में नोनवेज (मांसाहार) से बचे।
शुद्ध शाकाहारी भोजन का ही सेवन करें।
(5).भीड़ भाड़, मेले, धरने, प्रदर्शन जैसी जगहों से बचे या दूर रहें।
(6) कमसे कम यात्राएं करे।

प्रत्येक औषधि जो लिखी गई है उसको अपने निजी आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह से भी ले सकते हैं। तथा औषधि की मात्रा आयु (उम्र) के अनुसार ही निर्धारित करे। इसमे लिखी गई मात्रा सामान्य युवा व्यक्ति के लिए लागु है।

               
       डाक्टर सतेन्द्र सिंह
     1192/1साऊथ सिविल लाइंस मुजफ्फरनगर।
9837447742