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लॉक डाउन के चलते मंसूरपुर का मुख्य बाजार सन्नाटे की आगोश में,कोरोना का ख़ौफ़ योद्धाओं का साथ देते हुए लॉक डाउन का कर रहे पालन
April 30, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • मुज़फ्फरनगर

 

राशिद कस्सार 

मंसूरपुर- कस्बे के मुख्य मार्ग अनेक तरह की दुकानों से सजे तथा कारोबार व जरूरी खरीदारी के मकसद से कस्बे समेत क्षेत्र से बड़ी संख्या में आने वाले लोगों की चहल-पहल के चलते हमेशा भीड़ से व्यस्त रहने वाला मिल मंसूरपुर मुख्य बाजार कोरोना वायरस के चलते इन दिनों पूरी तरह सन्नाटा के घेराव में है। कारोबार में घरेलू जरूरतों के कारण कस्बे को प्रतिदिन आने वाले क्षेत्र के लोग भी अब घर के आंगन तक सीमित होकर रह गए हैं ध्यान हो कि दुनिया भर के विभिन्न देशों में कोरोना नामी वैश्विक महामारी अपना कहर बरपाये हुए हैं।
आलम यह है कि चीन से शुरू होकर अब यह मर्ज दुनिया के अलग-अलग देशों में अपने पैर पसार चुका है हालांकि भारत में अन्य देशों की तुलना में इसके फैलने की गति काफी धीमी है फिर भी एहतियात के तौर पर इससे बचाव हेतु स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हिदायतों  पर अमल करते हुए लोग पूरी सावधानी बरत रहे हैं ताकि कोरोना संक्रमण के प्रभाव से सुरक्षित रह सके। उक्त वायरस के प्रसार को रोकने तथा इस पर नियंत्रण पाने हेतु मानव जीवन की सुरक्षा के ख्याल से भारत सरकार द्वारा देश में लॉक डाउन जैसे ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की जा चुकी है। जिसके रद्दे अमल में पुलिस व प्रशासन भी गंभीरता के साथ सक्रियता बरत रहे है। दैनिक प्रयोग में आने वाली आवश्यक वस्तुओं और राशन सामग्री लाने को लेकर कोई समस्या उत्पन्न ना हो इसके दृष्टिगत सोशल डिस्टेंसिंग का खास ख्याल करते हुए मात्र होलसेल विक्रेताओं को प्रशासनिक स्तर से सुबह 6:00 से 9:00 बजे तक केवल फुटकर विक्रेताओं को सामान की बिक्री करने हेतु गुंजाइश दी गई है। जिससे लोगों को जरूरी चीजों के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। इसलिए रिटेलर्स की यह जिम्मेदारी है कि वह घर जाकर आवश्यक सामान की होम डिलीवरी करें। उधर कोरोना वायरस गली- गलियारों से चौराहों तक की चहल-पहल को खासतौर प्रभावित किए हुए है। उक्त वायरस की जद में न आ जाए इस डर से लोग बाजार तो दूर घरों के दरवाजे तक आने से कतरा रहे हैं। मंसूरपुर बाजार अति व्यस्त होने के चलते पर प्रायः जाम की जद में रहता था अब हालात यह है कि खुद राहगीरों की राह तक रहा है। कारोबार व घरेलू जरूरतों के कारण कस्बे को प्रतिदिन आने वाले क्षेत्र के लोग भी अब घर के आंगन तक सीमित होकर रह गए है।