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लॉक डॉउन में दुखद खबर : तीन दिन से उपचार नही मिलने के कारण 8 माह के बच्चे की मौत
April 29, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • मुज़फ्फरनगर

दुखद-तीन दिन से उपचार नही मिलने के कारण 8 माह के बच्चे की मौत हुई
जमीन गिरवी रखकर माता-पिता बच्चे को उपचार दिलाने के लिए खा रहे थे धक्के।उपचार के लिए मीरापुर पहुँचने से पूर्व ही बच्चे की मौत हुई

नईम चौधरी

मीरापुर।। कोरोना के भय के चलते तीन दिन से बीमार 8 माह के बच्चे की उपचार नही मिलने से तड़प- तड़पकर मौत हो गई।बीमार बच्चें के माता पिता ने बच्चे के उपचार के लिए जमीन गिरवी रखकर साहूकार से पचास हज़ार रुपये भी उधार लिए थे।बच्चे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया।मासूम को उपचार के अभाव में मृत देख माँ बेहोश हुई।
कोरोना वायरस के कारण देश मे लॉक डाउन लागू है।वही कोरोना के भय के चलते बीमार लोगों को प्राइवेट अस्पतालों में उपचार नही मिल पा रहा है।जिस कारण पूरे देश मे सैकड़ो लोग अपनी जान गवाँ चुके है।जहाँ तीन दिन पहले मेरठ में उपचार के अभाव में एक व्यापारी की मौत हुई थी।वहीं मंगलवार को मीरापुर में उपचार नही मिलने के कारण डॉक्टर के यहाँ पहुँचने से पूर्व ही एक 8 माह के बच्चे की मौत हो गयी।मेरठ जनपद के फलावदा थाना क्षेत्र के गांव सनौता निवासी ऐजाद का 8 माह का पुत्र ईशान पिछले तीन दिनों से डायरिया से ग्रस्त था बच्चे को उल्टी दस्त लगे हुए थे।जिसके चलते ऐजाद व उसकी पत्नी निलोफर ने बच्चे को गांव में ही एक डॉक्टर को दिखाया किन्तु बच्चे को आराम नही लगा।डॉक्टर ने बच्चे को मवाना या मेरठ में किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाने की सलाह दी।किन्तु लॉक डाउन के चलते आर्थिक तंगी झेल रहे ऐजाद पर उपचार के लिए पैसे नही थे जिसके बाद अपने मासूम की ख़ातिर ऐजाद ने अपनी जमीन एक साहूकार के पास गिरवी रखकर बच्चे के उपचार के लिए पचास हज़ार रुपये उधार लिए तथा अपने 8 माह के मासूम को लेकर मवाना के एक सुप्रसिद्ध डॉक्टर के यहाँ पहुँचा किन्तु बताया गया कि कोरोना के कारण उक्त डॉक्टर ने बच्चे को भर्ती करने से इनकार कर दिया।जिसके बाद ऐजाद व उसकी पत्नी निलोफर अपने मासूम को लेकर मवाना में ही कई अस्पतालों में गई किन्तु सभी ने बच्चे की हालत खराब बताते हुए उपचार से इनकार कर दिया।जिसके बाद दम्पति उसे वापिस गांव ले गए।मंगलवार को मीरापुर के ग्राम खेड़ी निवासी एक डॉक्टर  किसी कार्य से सनौता गया जहाँ उसे ऐजाद के बीमार मासूम बच्चे को तीन दिन से उपचार नही मिलने की  जानकारी मिली।तो मानवता का परिचय देते हुए उक्त डॉक्टर शोकीन अपने साथ बच्चें की माँ निलोफर व पिता ऐजाद को बच्चें का ईलाज कराने के लिए मीरापुर के एक डॉक्टर के यहाँ दिखाने के लिए लेकर चल दिया।किन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मीरापुर डॉक्टर के यहाँ पहुँचने से पूर्व उपचार नही मिलने के कारण रास्ते मे ही 8 माह के मासूम की मौत हो गयी।इसके बावजूद भी ममता के वशीभूत माता पिता मृत मासूम को लेकर मीरापुर पहुँचे जहाँ डॉक्टर ने बच्चे के मृत होने की बात बताई।अपनी गोद मे ही मासूम के प्राण निकले देखकर बच्चे की माह सड़क पर ही बेहोश हो गयी।बच्चे की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया।और रोते बिलखते परिजन सिस्टम की बदहाली व अपनी किस्मत को कोसते रहे।