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महिलाओं का धूम्रपान गर्भस्थ शिशु के लिये घातक,एक्टोपिक प्रेगनेंसी और गर्भाशय कैंसर का खतरा
November 14, 2019 • TRUE स्टोरी टीम/संजय वर्मा


 मेरठ। धूम्रपान सेहत के लिये घातक है लेकिन गर्भावस्था में धूम्रपान करना और भी हानिकारक हो सकता है। यह मां के लिये तो नुकसानदायक है ही, साथ ही होने वाले बच्चे के लिये और भी घातक साबित हो सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि महिलाओं के धूम्रपान करने से कई बार उन्हें एक्टोपिक प्रेगनेंसी यानी अस्थानिक गर्भावस्था का खतरा पैदा हो जाता है। इसके कारण कई बार महिलाएं बाझपन की शिकार हो जाती हैं।
महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षका डा. मनीषा वर्मा ने बताया एक्टोपिक गर्भावस्था में अंडे गर्भाशय की बजाय फैलोपियन टयूब के अंदर प्रत्यारोपित हो जाते हैं। इसके कारण गर्भाशय में परिवर्तन आ सकता है साथ ही  गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया गर्भाशय के दौरान कई तरह की समस्या पैदा हो सकती हैं। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के अलावा समय से पूर्व प्रसव भी हो सकता है। मां के धूम्रपान करने से शिशु का विकास प्रभावित होता है। पैदा होने वाले शिशुओं का वजन काफी कम होता है। इसके अतिरिक्त उनकी लंबाई कम होती है। शिशु प्रसव के दौरान बीमार हो जाता है और उसकी मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
 परिवार नियोजन की नोडल अधिकारी डा. पूजा शर्मा ने बताया धूम्रपान पुरूषों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है और महिलाओं में बाझपन का कारण बन सकता है। धूम्रपान करने वाली महिलाओं में बाझपन की आशंका 60 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
 उन्होंने बताया तंबाकू फेफड़ों को नुकसान पहुंचाती है। तंबाकू में मौजूद जहरीले केमिकल, निकोटिन,टार और कार्बन-डाइऑक्साइड त्वचा कैंसर, हार्ट अटैक और पुरूषों में लो स्पर्म काउंट जैसी कई गंभीर बीमारी की वजह बन सकते हैं। उन्होंने बताया महिलाएं व युवा धूम्रपान कर अपनी जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चला रहा है। पिछले चार सालों में विभाग की जागरूकता के कारण धूम्रपान करने वालों में चार से पांच प्रतिशत की कमी आयी है।
 गर्भ में बच्चे को होता है खतरा
 बाल रोग विशेषज्ञ डा. पी के बंसल ने बताया गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान करने से गर्भस्थ बच्चे को भी नुकसान पहुंच सकता है। गर्भावस्था में धूम्रपान से शिशु की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिसके कारण बच्चे को कई असामान्य बीमारियां होने का खतरा रहता है। सामान्य दिनों में भी बच्चे को सर्दी-खांसी और फ्लू रोग ज्यादा होते हैं।