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सैफ़ी संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हसीन अहमद सैफ़ी की अपील, ज़रूरतमंदो तक पहुँचाए मदद। 
April 18, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • सरधना

अहमद हुसैन

माह-ए-रमज़ान से पहले अदा करें ज़कात,   सैफ़ी संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हसीन अहमद सैफ़ी ने सभी मुस्लिम समाज के लोगों से अपील करते हुए कहा कि इस साल  25 या 26 अप्रैल से मुक़द्दस माह रमज़ान शुरू होने जा रहे है। उलेमाओं के कहे मुताबिक रमज़ान शरीफ में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज़ नमाज़-ए-तरावीह और पांचो वक़्त की नमाज़ अदा करने में पहले जैसा ही मसअला रहेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में ही रहकर पांच वक़्त व नमाज़ ए तरावीह अदा करें, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देशव्यापी लॉक डाउन का पालन भी होता रहे और इबादत में भी कोई कमी न हो सके। सड़को पर बेवजह की भीड़ इक्कट्ठा न करें। इफ्तार व सहरी घरों में ही रहकर करें । 
       सैफी संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष हसीन अहमद सैफ़ी ने अपील करते हुए कहा कि आज हमारे मुल्क में लॉकडाउन के चलते लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। हुक़ूमत ए हिन्द ने 3 मई तक लॉकडाउन को बढ़ा दिया है। ऐसे वक़्त में लोगों के सामने घर चालाना मुश्किल हो गया है। इस वक़्त गरीब, मज़लूम, यतीमों और बेवाओं (विधवाओं) को दवा, राशन व रुपए की सख्त जरूरत है। इस्लाम में पांच फर्ज में ज़कात का भी एक फ्राइज़ है, जो मुसलमान साहिबे निसाब (शरई मालदार) है यानि जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या इसकी कीमत के बराबर माल या रुपए या साढ़े बावन तोला चाँदी या इसकी कीमत का माल हो वह लोग मुक़द्दस माह रमज़ान का इंतज़ार न करते हुए अपने कुल माल का 2.5% निकाल कर जल्द से जल्द हक़दारों तक राशन या रकम पहुँचा दे, ताकि रोज़ेदारों को रोज़े रखने में सहूलियत रहे। ज़कात निकालने का ये सबसे मुनासिब वक़्त है। ज़कात के अलावा सदका और खैरात भी दिल खोलकर अदा करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अल्लाह को पोशीदा (छिपी हुई) इबादत पसंद है, इसलिए गरीबों की मदद करते वक़्त रियाकारी  (दिखावा) हरगिज़ हरगिज़ न करें। उन्होंने आगे कहा कि अपने पड़ोसी व रिश्तेदारों का खास ख्याल रखें। ज़कात निकालने का सही तरीका उलेमा-ए-इकराम से ज़रूर पूछ लें। मालिक अपने मुलाज़िमों (अपने यहाँ काम करने वालों) को उनकी मजदूरी वक़्त पर दे, हो सके तो उनकी अलग से मदद कर दे। वही इंसान के लिए जिस्मानी ओ रूहानी, सेहत ओ तंदरूस्ती से बढ़ कर कोई दूसरी नेअमत नही हो सकती है। इसलिए हम सब अपनी ज़िम्मेदारी को समझते हुए लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें। घरों में रह कर अपने रब की इबादत करे। अपने और मुल्क के सभी लोगों के लिए दुआओं का भी एहतमाम करें। इस दौरान  बाद नमाज जुमा हसीन अहमद सैफ़ी ने लॉकडाउन का पालन करते हुए करीब 50 गरीब, मजलूम परिवार के लिए राशन किट तैयार की और अकेले  घर घर जाकर राशन जरूरतमन्दों तक पहुंचाया।
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