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सोरायसिस क्या है-: बता रहे एक्सपर्ट.....
February 11, 2020 • TRUE स्टोरी टीम • स्वास्थ्य

सोरायसिस (छाल रोग )

 सोरायसिस एक त्वचा विकार है जिसमें शरीर की त्वचा पर लाल  रंग के परतदार चक्कते दिखाई देते हैं यह बार-बार होने वाली बीमारी है जो कि समय के साथ-साथ बढ़ती चली जाती है सोरायसिस संक्रामक रोग नहीं है शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली में गड़बड़ी को इसका कारण माना गया है त्वचा की पुरानी कोशिकाओं को बदलने और नई कोशिकाओं का निर्माण होने में 28 दिन का समय लगता है लेकिन सोरायसिसरोग से पीड़ित रोगियों की त्वचा केवल चार-पांच दिनों में नई कोशिकाओं का निर्माण करने लगती है इसमें रक्त कोशिकाओं का जमना शुरू हो जाता है त्वचा पर लाल , शुष्क  खुजली पैदा करने वाले चकत्ते बन जाते हैं समय पर इलाज न होने पर यह बीमारी लाइलाज हो जाती है

 सोरायसिस के लक्षण -: त्वचा पर बहुत खुजली होती है कभी-कभी त्वचा की स्थिति ज्यादा खराब होकर त्वचा पर सूजन हो जाती है कभी-कभी रोगी दर्द महसूस करता है जिसके परिणाम स्वरुप त्वचा पर मोटे मोटे  दाग धब्बे हो जातेहैंशुष्क दागो से खून भी निकलने लगता है निरंतर खुजली होने लगती है यह रोग जोड़ों को भी प्रभावित कर देता है जोड़ों में सूजन आ सकती है सोरायसिस से रोगी  पर मानसिक प्रभाव भी हो सकता है आयुर्वेद में यह माना जाता है कि अधिक असामान्य भोजन जैसे दही मछली को एक साथ खाने से  ,शहद, लहसुन, मूली, तेल युक्त भोजन समुद्री जीव का भोजन जंक फूड का अत्यधिक सेवन भी रोग का मुख्य कारण है ।तनाव और मानसिक विकार अत्यधिक मद्यपान और धूम्रपान से भी सोरायसिस रोग बढ़ जाता है‌

 सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार -:
आयुर्वेद के अनुसार सोरायसिस को क्षुद्र कुष्ट रोग भी कहते हैं ‌त्रिद जिनमें तीनों दोष वात, पित्त ,कफ  कुपित हो जाते हैं ।  सोरायसिस कृच्छ साध्य(लम्बे समय में) ठीक होने वाला  रोग है यानी एक बार ‌यदि   रोग हो जाए तो यह देर से ही ठीक होता है।
सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार :-
1) आरोग्य वर्धनी वटी 125 मिली ग्राम की 2 -2 गोली दिन में दो बार पानी के साथ।
2)सत्वगिलोय 250 मिली ग्राम,
  गंधक( सहस्त्रपुटी )125 मिली ग्राम ,कपर्दक भस्म  (सहस्त्रपुटी) 125 मिली ग्राम तीनों को मिला कर दिन में दो बार शहद के साथ।
विषेश- सहस्त्रपुटी गन्धक व कपर्दक भस्म बनाने के लिए 100  
बार गोघृत से ‌शोधन करना पड़ता है।

3)खदिरारिष्ट 2 चम्मच बराबर पानी मिलाकर सुबह-शाम भोजन के बाद।
4) सोरायसिस के चकत्तो को संक्रमण से बचाने व शुष्क होने से रोकने के लिए नीम के तेल की मालिश करें।
5) पंचकर्म कराने से सोरायसिस रोग जल्दी ठीक हो जाता है। जिसमें रोगी को वमन, विरेचन,स्नेहन,स्वेदन,लंघन कराया जाता है।
डॉ सत्येंद्र सिंह 
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