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स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 30 से  
January 29, 2020 • TRUE स्टोरी टीम

Sanjay varma
मेरठ। । महात्मा गांधी की पुण्य तिथि पर 30 जनवरी से राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण कार्यक्रम के तहत स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है। अभियान 13 फरवरी तक चलेगा। अभियाम में लोगों के बीच कुष्ठ रोग को लेकर जागरूकता पैदा की जाएगी और उसके लक्षणों के बारे में बताया जाएगा। इसके लिए आशाए एएनएम व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के द्वारा पोस्टर व पम्पलेट्स वितरित किए जाएंगे। पम्पलेट्स पर कुष्ठ रोग के लक्षण तथा जांच व इलाज के बारे में पूरी जानकारी रहेगी। इसके साथ ही ?कुष्ठ रोग विभाग की टीम घर.घर जाकर लक्षणों की जांच करेगी।
जिला कुष्ठ अधिकारी डा धीरेन्द्र कुमार ने बताया इस बार अभियान की थीम है ष्कुष्ठ के विरुद्ध, आखिरी युद्ध। उन्होंने कहा कुष्ठ रोग अभिशाप नहींए बल्कि एक रोग है, जिसका पूरी तरह उपचार संभव है। यह रोग वंशानुगत नहीं है। यह छूआछूत से फैलने वाला रोग भी नहीं है। माइक्रो बैक्टिरियम लेप्राई और माइक्रोबैक्टेरियम लेप्रोमेटासिस जैसे जीवाणुओं की वजह से यह रोग होता है। यह मनुष्यों में विकलांगता का एक बड़ा कारण बन जाता है। आंखों, हाथों तथा पैरों में विकंलागता पैदा करता है। कुष्ठ रोग की जांच जिला अस्पताल, एलएलआरएम मेडिकल कालेज, सुभारती मेडिकल कालेज के अतिरिक्त जिले के समस्त सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर नि:शुल्क की जाती है। विभाग की ओर से मरीजों को बैसाखीए स्प्लिंट एमसीआर चप्पल भी नि:शुल्क प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त आपरेशन के दौरान सरकार की ओर से मरीज को चार किस्तों में 8 हजार रूपये प्रदान किये जाते हैं। उन्होंने बताया कुष्ठ रोग निवारण के लिये विभाग की एक दर्जन से अधिक टीमें आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कार्य कर रही हैं। उन्होंने बताया 2019 में अप्रैल माहमें 22 मरीज, मई में 31, जून में 35, जुलाई में 25, अगस्त में 30, सितम्बर में 21, अक्टूबर में 18, नवम्बर में 18, दिसम्बर में 12 व जनवरी में अब तक 15 मरीज मिले हैं। इनका उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया 14 दिन तक चलने वाले अभियान के लिये विभाग की ओर से पूरी तैयारी कर ली गयी है।
कुष्ठ रोग के लक्षण:-
त्वचा पर हल्के लाल या तांबई रंग के दाग या धब्बे हों , त्वचा के दाग धब्बों में संवेदनहीनता, सुनपन हो, पैरों में अस्थिरता या झुनझुनी हो, हाथ पैर या पलकें कमजोर हों, नसों में दर्द, कान व चेहरे पर सूजन या गांठ हो। हाथ या पैरों पर घाव हों, लेकिन उनमें दर्द न हो।
ऐेसे होता है उपचार
डा. धीरेन्द्र ने बताया कुष्ठ रोगी का उपचार दो तरह से किया जाता है। अगर किसी रोगी के शरीर में एक से पांच चकत्ते हैं या एक नस ब्लॉक है तो उसका छ: माह इलाज किया जाता है। अगर किसी रोगी के शरीर पर पांच से अधिक चकत्ते हैं या दो नस ब्लॉक हैं तो 12 माह उपचार किया जाता है। दोनों प्रकार के मरीजों को पहली खुराक चिकित्सक के सामने खानी होती है।